Marriage-Divorce Legal Counseling No.15
By Ravi ,8709772355
अच्छा कारोबार या नौकरी होने के बावजूद भी आजकल शादी के रिश्ते क्यों नहीं हो रहे?
अच्छा कारोबार और नौकरी होने के बाद भी आजकल शादी के रिश्ते न होने की वजह लोगों का अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने के साथ साथ रिश्ते निभाने वाले गुणों का अभाव, अपना पराया वाला भेदभाव है।
कोई भी व्यक्ति शादी इसलिए नहीं करता की शादी और संतान के जन्म के बाद शादी टूट जाए। लेकिन वर्तमान समय में शादी के बाद अनेक लोगों के रिश्तों में दरार आ जाती है। इसकी वजह लोगों का अहंकार, मैं, मेरा, मेरा परिवार शब्दों का इस्तेमाल और अप्रिय व्यवहार है। शादी होने के लिए हम, हमारा, हमारा परिवार आदि शब्दों को बिना कथनी और करनी में अंतर किए अपनाना होगा। अहम का त्याग करना होगा। विवाह सच्चे दिल से समर्पण चाहता है। इसका अभाव विवाह के मार्ग में बड़ी बाधा है।
विवाह के गणित में एक और एक मिलकर एक होता है। विवाह सिर्फ दो दिलों का मेल नहीं दो परिवारों का मेल होता है लेकिन आमतौर पर लोग शादी के बाद ये बातें भूल जाते हैं। वे जीवनसाथी के अनुरूप खुद को बदलने की अपेक्षा उसे बदलना चाहते हैं। पूरा परिवार नए सदस्य के अनुरूप अपनी एक भी आदत बदलना नहीं चाहता। ऐसे में मन के अनुरूप जीवनसाथी न मिलने पर शादी करना आज के आत्मनिर्भर युवा को "आ बैल मुझे मार" लगता है। परिणामस्वरूप अच्छा कारोबार और नौकरी होने के बाद भी शादी करना कठिन हो गया है।
पहले लोगों में रिश्ता निभाने की विवशता थी, समाज का भय था, दूसरी अच्छी शादी आसान नहीं थी। आज के समय में ये सब विवशताएं नहीं रह गई हैं। आज लोग अकेले भी पूरा जीवन खुशी से बीता लेते हैं। परिवार बड़ा करने के अतिरिक्त भी लोगों के पास कई जरूरी काम और जीवन जीने की वजह है। शादी में धोखा खाए लोगों को शादी "चार दिनों की चांदनी फिर अंधेरी रात" नज़र आती है।
पहले कहा जाता था, "मारो पिया या गाली दो तेरा ही आसरा है"। आज के संदर्भ में इस तरह की बात की कल्पना करना भी मुश्किल है। एक निम्न वर्गीय परिवार की लड़की ने अपनी शादी विवाह से पहले सिर्फ इसलिए तोड़ दी क्योंकि उसका होने वाला पति उसे बातचीत के क्रम में सम्मान नहीं देता था।
ऐसे भी आज के समय में लड़कियों के संदर्भ में "एक अनार सौ बीमार" वाली बात है। फिर मन के अनुरूप जीवनसाथी की चाह क्यों न करें।
पहले विदाई के बाद ससुराल से लड़ झगड़ कर लड़की का मायके वापस आना अच्छा नहीं समझा जाता था, रिश्ते निभाने की विवशता थी लेकिन आज दोनों के माता पिता अपनी संतान के संदर्भ में सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हैं। आज कुछ भी सहन करने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। अपेक्षाएं सबों को है। जब प्यार देने का नहीं लेने का नाम हो जायेगा तो शादी होने में कठिनाई आयेगी ही।
हम सभी जानते हैं, "अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता"। इसलिए सिर्फ एक पक्ष की समझदारी से काम नहीं बनने वाला।
शादी के लिए अच्छा कारोबार और नौकरी के साथ साथ समझदारी, वफादारी, ईमानदारी, न्यायप्रियता, सकारात्मक सोच, सहयोगी स्वभाव और एक दूसरे को थोड़ा स्पेस देना भी अनिवार्य है।
जीवन जीना एक कला है। इसकी जानकारी भी शादी के लिए आवश्यक गुणों में से एक है। कोई भी बोरिंग व्यक्ति से शादी करना नहीं चाहता है।
वक्त को पहचाने, समझदार बने, शादी करने के मार्ग की बाधाएं समाप्त हो जाएंगी।
----------
Ek Client ...
ने जवाब का अनुरोध किया है